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अर्थव्यवस्था पर बिटकॉइन और क्रिप्टो मुद्रा के प्रभाव

अर्थव्यवस्था पर बिटकॉइन और क्रिप्टो मुद्रा के प्रभावक्या बिटकॉइन (क्रिप्टो करेंसी) हमारी जिंदगी को बदल सकता है?

क्या क्रिप्टो करेंसी एक बबल की तरह से बढ़ रहा है जो कभी भी फूट सकता है?

क्या क्रिप्टो करेंसी हमारी रिज़र्व बैंक द्वारा चलाए जा रहे रुपये की जगह ले सकता है?

आइये इन सभी प्रश्नों के उत्तर लेने की कोशिश करते हैं। जेमी डिमों, सी ई ओ, जे पी मॉर्गन चेस एंड कंपनी, ने हाल ही में बिट कॉइन के संदर्भ में कहा कि इसका अंत अच्छा नही हो सकता है। ये एक फ्रॉड है।

क्या डिमों सही हैं? ये कई अलग अलग फैक्टर्स पर डिपेंड करता है। इस समय बीत कॉइन एक हॉट केक की तरह प्रतीत होता है क्योंकि उसकी वैल्यू सोने की वैल्यू से भी ज्यादा तेजी से और फ्लक्चुएशन के साथ बढ़ रही है। कुछ लोगों ने बिटकॉइन में पैसा इन्वेस्ट करके रातों रात बहुत पैसा कमा लिया है। और वे दूसरों के लिए आर्दश बनते जा रहे है। लोग अपने घर बार बेच कर इसमे पैसा लगाने के बारे में सोचने लगे हैं।

क्रिप्टो करेंसी के पक्ष में तर्क देने के लिए वे कहते हैं कि ये बहुत लिमिटिड प्रोड्यूस होता है इसलिए इसकी वैल्यू हमेशा बढ़ती जानी है। इसीलिए ये सभी देशों की चालू करेंसी की जगह ले लेगा।

यहां इस संदर्भ में दो बातें जानना बहुत आवश्यक हैं जो आपको ये बता पाएंगी की क्या क्रिप्टो करेंसी का भविष्य उज्जवल है।

एक तो ये की बिट कॉइन का प्रोडक्शन लिमिटेड है पर क्रिप्टो करेंसी का नहीं। अर्थात लोग निरंतर रूप से नई क्रिप्टो करेंसी की ईजाद करते जा रहे हैं। जैसे DOGECOIN, LITECOIN आदि। अभी ETHER के नाम से एक नई करेंसी आ रही है जो स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स में उपयोग की जाएगी। कुछ ही समय के बाद आप देखेंगे कि नए स्टार्ट अप कंपनी अपनी खुद की क्रिप्टो करेंसी ईजाद करेंगे जिसके जरिये वे पूंजी इकठ्ठा करेंगे।

फिलहाल 900 तरह की क्रिप्टो करेंसी चलन में आ चुकी हैं। अफवाह है कि भारत सरकार भी लक्ष्मी के नाम से क्रिप्टो करेंसी लाना चाहती है। ये सिर्फ अफवाह ही है।

बिटकॉइन की लिमिटिड सप्लाई बता कर इसकी वैल्यू बढ़ती जा रही है, क्या आप को ऐसा नही लगता है कि रियल एस्टेट की वैल्यू की तरह से ये भी कभी लोगों को जमीन पर ला कर खड़ा कर देगा।

कुछ भले लोगों ने तो बिटकॉइन के लिए मल्टीलेवल मार्केटिंग भी चालू कर दिया है।

इसको प्रमोट करने वाले कहते है कि बिट कॉइन में ट्रांसेक्शन करने से टैक्स नही लगता है। इससे विदेशों में पैसा आसानी से भेजा जा सकता है। अर्थात ये एक पैरेलल इकॉनमी की शुरुआत है।

दूसरी खास बात ये है कि क्रिप्टो करेंसी कभी भी इकॉनमी में पेमेंट का स्टैण्डर्ड तरीका नही बन पाएगा। कभी भी सैलरी पाने का तरीका नहीं बन पाएगा। क्योंकि आप हमेशा चाहेंगे कि आपकी सैलरी उस रूप में मिले जो कि वोलेटाइल ना हो। आप अपनी सैलरी का अमाउंट पेमेंट डे और सामान खरीदने के दिन के बीच में काम होते हुए तो नही देखना चाहेंगे।

बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टो करेंसी कभी भी सरकारों द्वारा चलाई जा रही करेंसी को विस्थापित नहीं कर सकते हैं। चीन की सरकार ने इसे पूरी तरह से बेन कर दिया है। अमेरिका की सरकार इस पर पूरी तरह से कड़े कदम नही उठा रही है। और दूसरे देशों में भी फिलहाल क्रिप्टो करेंसी पर कोई रोक नही लगाई गई है। इसका अर्थ ये नही है कि ऐसा कभी नही होगा।

सभी देशों के आर्थिक कानून का उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग में क्रिप्टो करेंसी का दुरुपयोग इस समय हो रहा है। सभी देशों की सरकारें काला धन के सर्कुलेशन को लेकर परेशान हैं। क्रिप्टो करेंसी के आगमन से ये कार्य और भी कठिन हो रहा है।

निश्चित रूप से क्रिप्टो करेंसी बहुत वोलेटाइल हैऔर बहुत रिस्की भी है पर कुछ लोगों के लिए कुछ नहीं से कुछ बेहतर है।

यदि सरकारें सोचती हैं कि क्रिप्टो करेंसी से आर्थिक अराजकता बढ़ेगी तो उसे आज ही लगाम लगाना होगी और ऐसे प्रयास करना होंगे जैसे चीन ने किए है।

लेखक:-

अजय कुमार जैन

डायरेक्टर स्वराज वेल्थ मैनेजमेंट। जबलपुर।